समुदाय
समुदाय
नैगम सामाजिक दायित्‍व की यात्रा
विगत दो दशकों के दौरान, सामान्‍य लोकोपकारी कार्यकलापों से प्रारंभ होकर समुदाय के व्‍यावसायिक हितों को एकीकृत करते हुए नैगम सामाजिक दायित्‍व विकसि‍त हुआ है जिसमें कारोबार से संबंधित मूल्‍यों और दीर्घकालिक संपोषणीयता के माध्‍यम से यह सामाजिक, पर्यावरणीय और नैतिक जिम्‍मेदारियों को दर्शाता है। 

एक ऐसी कम्‍पनी, वैमानिकी जिसकी पहचान है, एचएएल ने इस क्षेत्र में अपने पांव जमा लिए हैं।  इसी जड़ से नैगम सामाजिक दायित्‍व की पहल का सूत्रपात होता है।

नैगम सामाजिक दायित्‍व एचएएल के कारोबार का अभिन्‍न अंग है, यह अंतरात्‍मा की आवाज़ है जिससे प्रेरित होकर जिस समाज़ में यह कार्य करता है उसी समाज़ को अर्पित भी करता है।  कम्‍पनी के नैगम सामाजिक दायित्‍व से संबंधित कार्य सिद्धांत नैगम सामाजिक दायित्‍व की पहलों से जुड़े होते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कम्‍पनी के साथ इसके इर्द-गिर्द समाज़ का भी विकास हो। 

नैगम सामाजिक दायित्‍व के अंतर्गत नैगम के निर्णयों में सार्वजनिक हित को शामिल किया जाता है और इसमें तीन “पी” अर्थात पीपुल, प्‍लेनेट एवं प्राफिट (लोक, भूमण्‍डल एवं लाभ) की समग्रता में पर्यावरण को श्रेणीबद्ध किया जाता है। समस्‍त जिम्‍मेदार संगठनों के समान स्‍थानीय समुदायों के साथ सक्रिय रूप से कार्य करते हुए एचएएल ने समुदाय आधारित विकास को अंगीकार किया है।  यह कार्य लोकोपकार से भी बड़ा हो जाता है क्‍योंकि इसमें विकास सातत्‍य बना रहता है।

वास्‍तव में, एचएएल इस विश्‍वास के साथ आबंटित मूल्‍य का निर्माण करता है कि कम्‍पनी की सफलता और सामाजिक कल्‍याण आपस में एक-दूसरे से जुड़े हों।

एचएएल वर्षों से सक्रिय रूप से समुदाय की प्रगति और विकास करते हुए विभिन्‍न पहलों के माध्‍यम से समुदाय और पर्यावरण दोनों के प्रति अपनी जिम्‍मेदारी का निर्वाह करता आ रहा है।
नैगम सामाजिक दायित्‍व की नीति
अपनी रणनीतिक योजना के मार्गदर्शन और अपनी नैगम सामाजिक दायित्‍व की पहलों को साकार रूप देने हेतु प्रत्‍येक औद्योगिक घराने के लिए नैगम सामाजिक दायित्‍व नीति की आवश्‍यकता पड़ती है जो इसके समग्र व्‍यापारिक नीति का अभिन्‍न अंग होना चाहिए और यह इसे व्‍यापारिक लक्ष्‍यों से जुड़ा होना चाहिए।  संपोषणीय विकास, सामाजिक प्रक्रिया के साथ व्‍यापारिक प्रक्रिया के एकीकरण तथा समाज की, जिसमें यह कारोबार करता है, की चिन्‍ताओं में सुधार हेतु रणनीति के रूप में एचएएल नैगम सामाजिक दायित्‍व नीति को अपनाने की आवश्‍यकता को तरजीह देता है।  कम्‍पनी यह बात स्‍वीकार करती है कि इसका निष्‍पादन आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरण, इन तीनों के संदर्भ में मापा जाएगा।

उपरोक्‍त को ध्‍यान में रखते हुए, 18 नवम्‍बर 2010 से कम्‍पनी की नैगम सामाजिक दायित्‍व की नीति तैयार की गई है।  इस नीति में उद्देश्‍यों, कार्यान्‍वयन की रणनीति, अनुमेय कार्यकलाप, जिन्‍हें नैगम सामाजिक दायित्‍व में शामिल किया जा सकता हो, परियोजनाओं / कार्यकलापों की पहचान, लक्ष्‍यों का निर्धारण, बजट प्रावधान, अनुश्रवण आदि का उल्‍लेख है। एचएएल की व्‍यापक नैगम सामाजिक दायित्‍व नीति में निम्‍नलिखित बातें शामिल हैं:

  • सामाजिक और सम्मिलित विकास कार्यकलाप
  • पर्यावरण /  पर्यावरण प्रबंधन प्रणालियों के प्रति आदर (एचएएल परिसर से बाहर भी)
  • समस्‍त पणधारियों का ध्‍यान रखना
  • नैतिक कार्य
  • मानव अधिकारों का आदर; और
  • आपदा प्रबंधन

इस नीति के अंतर्गत पर्यावरण, समाज और कम्‍पनी तीनों घटक नमूनों को सुदृढ़ बनाने का उद्देश्‍य है।

नया कम्‍पनी अधिनियम 2013 जारी होने के साथ, नैगम सामाजिक दायित्‍व के लिए निर्धारित नए कम्‍पनी अधिनियम की धारा 135 के अंतर्गत निर्धारित प्रावधानों के साथ कम्‍पनी की नैगम सामाजिक दायित्‍व नीति को अद्यतन बनाने की आवश्‍यकता है।  तदनुसार, एचएएल, कम्‍पनी के लिए नैगम सामाजिक दायित्‍व की नई नीति तैयार करने की प्रक्रिया में लगा है।
नैगम सामाजिक दायित्‍व परियोजनाऍं / कार्यकलाप
कम्‍पनी ने अपने प्रभागों के निकट कुछ गांवों को अपनाया है।  कम्‍पनी वर्षों से विभिन्‍न सामुदायिक विकास कार्यकलापों के जरिए नैगम सामाजिक दायित्‍व पहलों को कार्यान्वित करती आ रही है,  ये कार्य केवल अपनाए गए गांवों में ही नहीं बल्कि उन गांवों में भी किए जा रहे हैं जो प्रभागों के आसपास हैं।  इन पहलों के उदाहरण स्‍वरूप कार्यक्रम निम्‍नलिखित हैं:

  • आधारभू‍त सुविधाओं का विकास: गांवों में सड़कों, सामुदायिक हॉल, विद्यालय भवन का निर्माण, विद्यालयों में मेज, कुर्सी, अलमारी, कम्‍प्‍यूटर, दृश्‍य-श्रव्‍य उपकरणों का प्रावधान, पारम्‍परिक तथा नवीकरणीय बत्तियों का प्रावधान। चेक डैम का निर्माण, किसानों के लिए कृषि उपकरणों की व्‍यवस्‍था, गांवों में खेलकूद को बढ़ावा देने के विचार से ग्रामीण खेलकूद के मैदानों का विकास आदिं
  • पेयजल की सुविधाऍं: पेयजल मौलिक आवश्‍यकता है।  ग्रामवासियों को पानी लाने के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता है।  पीने के लिए अच्‍छे पानी की उपलब्‍धता एक समस्‍या है। पानी लाने के लिए दूर तक आने-जाने के शारीरिक श्रम को कम करने के लिए ट्यूबवेल और कुओं की व्‍यवस्‍था की गई है।  सम्‍प और छत पर टंकियों का निर्माण किया गया है तथा आवासों तक जल की पाइपें बिछाई गई हैं।  आवश्‍यकता के आधार पर आरओ प्रणालियॉं प्रदान की गई हैं। पीने के शुद्ध पानी की व्‍यवस्‍था के फलस्‍वरूप जनता के स्‍वास्‍थ्‍य-सुधार में सहायता मिली है।
  • कुशलता का विकास: एचएएल स्‍व-रोजगार के लिए दक्षता विकास कार्यक्रमों को समर्थन प्रदान करता है जिसमें युवकों को कैड/कैम, कम्‍प्‍यूटर हार्डवेयर एवं नेटवर्किंग तथा इलेक्‍ट्रॉनिक सामान की मरम्‍मत करने में प्रशिक्षित किया जाता है। पापड़, अचार, गुड़िया, कैन्‍डल, अगरबत्‍ती, फिनाइल, जूट के उत्‍पादों, पत्‍तल, इलेक्ट्रिकल वायरिंग एवं मरम्‍मत, मोबाइल फोन की मरम्‍मत, वाहनों की मरम्‍मत, मशरूम की खेती, कृषि, वातानुकूल उपकरण की मरम्‍मत, सिलाई एवं कढ़ाई, चित्रकला एवं पेंटिंग, वाहन चालन, नलसाजी, चिनाई, गांवों में प्रथमोपचार केन्‍द्रों के प्रबंधन हेतु प्रथमोपचार प्रशिक्षण आदि में स्‍व-रोजगार पैदा करने के कार्यक्रम के जरिए जीवकोपार्जन की दृष्टि से ग्रामीण युवकों को प्रशिक्षित किया जाता है। 
  • आईटीआई एवं शिक्षुता प्रशिक्षण (एकीकृत पाठ्यक्रम): नैगम सामाजिक दायित्‍व के अंतर्गत बेंगलूर एवं कोरापुट के तकनीकी प्रशिक्षण संस्‍थानों के माध्‍यम से व्‍यावसायिक ट्रेड में प्रशिक्षण (तीन वर्ष का पाठ्यक्रम) दसवीं कक्षा उत्‍तीर्ण 40 छात्रों (प्रति बैच 20 छात्र) को शामिल करने का प्रस्‍ताव है।
  • चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य सेवाऍं: नैगम सामाजिक दायित्‍व के भाग के रूप में कम्‍पनी ने आवश्‍यकता के अनुसार मोतियाबिन्‍द की शल्‍य चिकित्‍सा करने के साथ-साथ नेत्र शिविर जैसे चिकित्‍सा शिविरों और सामान्‍य चिकित्‍सा शिविरों, एचआईवी / एड्स जागरूकता कार्यक्रमों, परिवार नियोजन शिविरों, टीकाकरण, प्रसवपूर्व जॉंच, बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य जॉंच का आयोजन किया है।  चिकित्‍सा शिविरों के भाग के रूप में दवाइयों, श्रव्‍य उपकरणों, कृत्रिम अंगों, विकलांगों के लिए तिपहिया साइकलों आदि का वितरण किया गया है।  पहचाने गए रोगियों को आगे के उपचार के लिए अंतर्रोगी एवं बर्हिर्रोगी के रूप में एचएएल अस्‍पताल लाया जाता है।
  • क्रीड़ा एवं खेलकूद का आयोजन: एचएएल प्रभागों के निकटवर्ती गांवों में रहने वाले युवकों के शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार करने के विचार से क्रीड़ा एवं खेलकूद का आयोजन किया जाता है।  इस प्रकार निकटवर्ती गांव के युवकों और संगठन के बीच अनुकूल सामाजिक संबंध के निर्माण / सुधार में सहायता मिलती है।
  • भारतीय खेल प्राधिकरण के माध्‍यम से तीरंदाजी एवं फुटबाल में कोचिंग: आदिवासी/ग्रामीण खेलकूद प्रतिभा की पहचान एवं पोषण और इसे राष्‍ट्रीय / अन्‍तर्राष्‍ट्रीय स्‍तर तक लाने के उद्देश्‍य से भारतीय खेल प्राधिकरण के तकनीकी समर्थन से जुलाई 2010 से सूनाबेड़ा में क्रीड़ा अकादमी की स्‍थापना की गई है।  13-16 वर्ष की आयु वर्ग के छात्रों को तीरंदाजी एवं फुटबाल के क्षेत्रों में शामिल किया जाता है।  इन छात्रों का चयन ओडिशा के अविभाजित कोरापुट जिले से किया जाता है।  तीरंदाजी एवं फुटबाल में विशेष कोचिंग के अलावा इन छात्रों को कम्‍पनी द्वारा सुसज्जित आवास, ठहरने के लिए हॉस्‍टल, खेलकूद के सामान, खेलकूद के लिए यूनीफार्म, ट्रेक-सूट, जूते आदि नि:शुल्‍क प्रदान किए जाते हैं।  छात्रों को एचएएल विद्यालयों में नि:शुल्‍क शिक्षा दी जाती है। साथ-साथ अध्‍ययन सामग्री, स्‍कूल के बस्‍ते, जूते, स्‍कूल यूनीफार्म, बरसाती कोट और स्‍वेटर आदि दिए जाते हैं।  विद्यालय और छात्रावास से आने-जाने के लिए बाइसिकल प्रदान की जाती है।  छात्रों को हमेशा फिट बने रहने के लिए आधुनिक व्‍यायामशाला सुविधाऍं प्रदान की गई हैं।  प्रतिस्‍पर्धात्‍मक खेलकूद में भाग लेने के लिए छात्रों को टीए/डीए आदि दिए जाते हैं।  विगत तीन वर्षों के दौरान कुछ छात्रों ने राज्‍य एवं राष्‍ट्रीय स्‍तर के पुरस्‍कार जीते हैं।
नैगम सामाजिक दायित्‍व वर्ष 2013-14:
1. कम्‍पनी की विधिवत निर्धारित नैगम सामाजिक दायित्‍व नीति है जो नैगम सामाजिक दायित्‍व की परियोजनाओं / कार्यकलापों को अंजाम देने के लिए ढॉंचा तैयार करती है।  मुख्‍यालय स्‍तर पर मण्‍डल की नैगम सामाजिक दायित्‍व एवं एसडी समिति देखरेख निकाय के रूप में काम करती है जिसमें स्‍वतंत्र निदेशक, समिति के अध्‍यक्ष हैं।

2. वर्ष 2013-14 के समझौता ज्ञापन के अनुसार एचएएल में नैगम सामाजिक दायित्‍व एवं एसडी परियोजनाओं/कार्यकलापों को प्रारंभ किया गया था जो निम्‍नलिखित हैं:

  • संगठन के अंदर नैगम सामाजिक दायित्‍व और संपोषणीयता कार्यसूची को आत्‍मसात करने में कर्मचारियों और उच्‍चस्‍थ प्रबंध का लगाव: इस प्रतिमान के अंतर्गत आयोजित किए गए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को इकाई मापन के रूप में लिया जाता है और कम्‍पनी ने वर्ष 2013-14 के दौरान 13 प्रशिक्षण कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक आयोजन किया जबकि लक्ष्‍य था 10
  • समुचित कारपोरेट संचार रणनीति में महत्‍त्‍वपूर्ण पणधारियों को लगाना।  कम्‍पनी में प्रमुख पणधारियों के समस्‍त समूह को साधन के रूप में प्रयोग करने के लिए प्रभागों / काम्‍प्‍लेक्‍सों को यथासंभव अधिक से अधिक संचार करने हेतु प्रेरित किया गया और इस प्रकार कुल 28 संचार किए गए जबकि लक्ष्‍य था 10
  • नैगम सामाजिक दायित्‍व के कार्यकलापों की योजना, कार्यान्‍वयन और अनुश्रवण की प्रक्रिया में द्विस्‍तरीय संगठनात्‍मक ढॉंचे की प्रभावकारिता के मापन के लिए वर्ष 2013-14 के दौरान समझौता ज्ञापन के लक्ष्‍य के अनुसार नैगम सामाजिक दायित्‍व बोर्ड एवं एसडी समिति की 04 बैठकें की गईं तथा इस लक्ष्‍य को पाने में संगठन सफल रहा।
  • उपरोक्‍त के अलावा वर्ष के दौरान अंगीकार किए गए नैगम सामाजिक दायित्‍व परियोजनाओं / कार्यकलापों के कार्यान्‍वयन में सफलता के मापन के लिए एचएएल कोरापुट, मिग कॉम्‍प्‍लेक्‍स द्वारा नैगम सामाजिक दायित्‍व के अंतर्गत दो परियोजनाऍं अंगीकार की गईं।  इनसे संबंधित विवरण निम्‍नलिखित हैं:

क) आधारभूत संरचना के विकास के भाग के रूप में सुनाबेड़ा, जिला कोरापुट, ओडिशा के आसपास के 08 गॉंवों में 5.6 किमी लम्‍बी सड़क का निर्माण / नवीकरण / सुधार प्रारंभ किए गए तथा 31 मार्च 2014 तक 85 प्रतिशत परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।

ख) भारतीय खेल प्राधिकरण के सहयोग से एचएएल कोरापुट द्वारा क्रीड़ा एवं खेलकूद का विकास (वर्ष 2013-14 से वर्ष 2015-16 के लिए मध्‍यम अवधि की परियोजना) प्रारंभ किया गया, जिसमें फुटबाल में 16 छात्रों और तीरंदाजी में 14 छात्रों को शामिल किया गया ज‍बकि लक्ष्‍य था क्रमश: 10 एवं 5 छात्रों का।

3.  इन सब के अलावा प्रभागों द्वारा पहचानी गई आवश्‍यकताओं के आधार पर प्रभाग में विशेष नैगम सामाजिक दायित्‍व परियोजनाऍं / कार्यकलाप प्रारंभ किए गए थे।  कुछ परियोजनाओं का यहॉं पर उल्‍लेख किया जाना उचित है- सरकारी विद्यालयों में रसोईघर एवं भोजन-कक्ष का निर्माण, सिलाई में प्रशिक्षण और सिलाई मशीनों के वितरण द्वारा महिलाओं का सबलीकरण, बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकारी स्‍कूलों में छात्राओं के लिए शौचालयों का निर्माण, सौर ऊर्जा चालित सड़क-बत्तियों की व्‍यवस्‍था, चिकित्‍सा शिविरों का आयोजन, पशुओं और पक्षियों (वि‍लुप्‍त प्राय) को अपनाना आदि।

4. वर्ष 2013-14 के दौरान कम्‍पनी ने नैगम सामाजिक दायित्‍व और संपोषणीय विकास की बाबत 10.84 करोड़ रूपये खर्च किए जबकि आबंटित बजट की धनराशि थी 9.19 करोड़ रूपये और साथ ही मंत्रालय के साथ किए गए समझौता ज्ञापन के अनुसार विशेष कार्यकलापों को प्रारंभ किया गया।
बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत एवं पुनर्वास कार्यकलाप:
उत्‍तराखण्‍ड और ओडिशा में आई अभूतपूर्व बाढ़ की स्थितियों को देखते हुए, जिसमें धन-जन की पर्याप्‍त क्षति हुई, कम्‍पनी ने उत्‍तराखण्‍ड और ओडिशा के मुख्‍यमंत्री राहत कोष में क्रमश: दो करोड़ और एक करोड़ रूपये का अंशदान दिया।